कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने संसद में उठाए विपक्ष की आवाज दबाने के गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने संसद की कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब एमएम नरवणे की किताब पर राहुल गांधी चर्चा कर रहे थे, उस दिन चेयर पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही। गोगोई ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बार-बार टोका गया और स्पीकर उनसे अपनी बात ‘वेरिफाई’ करने के लिए कहते रहे। गोगोई ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया और कहा कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
राहुल गांधी और विपक्ष के बोलने पर रोक का आरोप
गोगोई ने बताया कि राहुल गांधी लगातार बोलने की अनुमति मांगते रहे, लेकिन उनके खड़े होने के दौरान स्पीकर ने किसी अन्य सदस्य को बोलने का मौका दे दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दिन बाद जब शशि थरूर सदन में बोल रहे थे, तब उनका माइक बंद कर दिया गया। गोगोई ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और प्रधानमंत्री नेहरू के बयान का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र में विरोधी हो सकते हैं लेकिन शत्रु नहीं। वर्तमान स्थिति में विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने का मौका नहीं मिलना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

प्रधानमंत्री और अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर सवाल
गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि देश का नेतृत्व केवल अपनी बात सुनता है, दूसरों की नहीं। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत द्वारा की गई ट्रेड डील पर सवाल उठाया और पूछा कि किस दबाव में यह डील हुई। इसके अलावा गोगोई ने मिडिल ईस्ट में जंग, तेल की आपूर्ति और पड़ोसी देशों से जुड़े निर्णयों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा के समय ओम बिरला द्वारा महिलाओं सांसदों के साथ व्यवहार को लेकर सलाह देना भी गलत संदेश देता है।
संसदीय कार्यमंत्री रिजिजू का पलटवार
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने गौरव गोगोई पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि गोगोई ने उनके ऊपर टिप्पणी की, लेकिन वे उम्र में छोटे हैं और तीन बार सदन के सदस्य रह चुके हैं। रिजिजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। उन्होंने नेहरू और राजीव गांधी के उदाहरण देते हुए कहा कि सांसदों को सदन के सम्मान को समझना चाहिए। रिजिजू ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया गया।